वर्ष २०१३-१४ में पत्रकार राहुल भाटिया ने पाया कि उनके प्रियजन बदल गए हैं। उनकी सोच, उनकी भाषा में बदलाव आ गया है − समाज में एक धर्मविशेष लोगों के प्रति। यह देख के राहुल कुछ हतप्रभ, कुछ परेशान हुए, और इसी परेशानी से उबरने के लिए उन्होंने लिखा है, ‘द आइडेंटिटी प्रोजेक्ट’। इस किताब का पहला भाग हिंदुत्व और हिन्दू राष्ट्रवाद का अध्यन है − आज के भारत में उनके दुष्प्रभाव का, उनके जड़ों, और उनके उद्भव का। किताब का दूसरा भाग भी एक अध्यन है − आधार या ‘युनीक आइडेंटिटी प्रोजेक्ट’ का। कैसे एक केंद्रीय गृह मंत्री के मन में आया विचार, प्रशासकों, विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व वकीलों के गंभीर आपत्तियों के बावजूद, हक़ीक़त बन गया। कौन से कड़ी इन दोनों भागों को जोड़ती है, सुनिए राहुल के साथ इस चर्चा में।
(‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)






