Himanshu Bhagat

Sambandh Ka Ke Ki


किताबों पर चर्चा, हिंदी में 

A conversation on books conducted in Hindi. 

हिमांशु भगत ने पंद्रह वर्षों तक क़िताब प्रकाशन व पत्रकारिता के क्षेत्रों में संपादन और लेखन का काम किया है।वे दिल्ली में रहते हैं।
Himanshu Bhagat has worked in the fields of book publishing and journalism as an editor and writer for 15 years. He lives in Delhi.

हर माह की पहली और पंद्रह तारीख को आपके लिए एक नई चर्चा
A new conversation on the 1st and 15th of every month.

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एपिसोड 37: ‘शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड’ − संघमित्रा चक्रवर्ती

फिल्म जगत की एक मशहूर ‘एक्टर-डायरेक्टर’ जोड़ी थी, सत्यजीत रे औरशौमित्रो चटर्जी की। शौमित्रो ने रे की २८ फिल्मों में से १४ में मुख्य किरदारनिभाया। इन १४ फिल्मों के अलावा शौमित्रो ने और भी बहुत कुछ किया। अपने६० साल के करियर में उन्होंने पुरे ३०० फिल्मों में काम किया। साथ-साथ, वेएक ‘थिएटर-एक्टर’, नाटककार, लेखक, कवि, संपादक, और चित्रकार भी थे।जनवरी 2020 में शौमित्रो ८५ साल के हो गये और उस साल उनकी सातफिल्में रिलीज़ हुई थीं। उसी वर्ष, शौमित्रो का देहांत हो गया। उनकी जीवनी‘शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड’ में संघमित्रा चक्रवर्ती लिखती हैं कि सत्यजीत रेके गुज़र जाने...

एपिसोड 36: ‘अपरूटेड’ − ईता मेहरोत्रा

विश्व भर में विकास के नाम पर जंगल काट कर ख़त्म किये जा रहे हैं। ऐसे में, अगर सरकार जंगल के एक टुकड़े को नेशनल पार्क घोषित कर देती है और वहाँ आदमी के निवास व आवाजाही को वर्जित कर देती है, तो इस को अच्छा ही माना जायेगा। मगर सदियों से इन्ही जंगलों का एक अभिन्न हिस्सा रहे हैं, इनमे वास करने वाले आदिवासी। अगर वन संरक्षण के नाम पर उनको किसी नेशनल पार्क से जबरन निकाल दिया जाय, तो क्या ये उचित होगा? आज, उत्तराखंड की वन-गूजर जनजाति इसी विडम्बना का शिकार है। ईता मेहरोत्रा अपनी ग्राफ़िक या चित्रपट शैली में बनाई गई पुस्तक ‘अपरूटेड’ में वन गुज़रों की व्यथा और उनकी परिस्थितियों की दृढ़ता से...

एपिसोड 35: ‘द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया’ज़ डेमोक्रेसी’ − प्रेम शंकर झा

प्रेम शंकर झा की नई किताब का नाम है − ‘द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया’ज़ डेमोक्रेसी’; हिंदी में कहें तो, ‘भारतीय लोकतंत्र का विध्वंस’। झा को पत्रकारिता करते हुए पचास से ज़्यादा साल हो चुके हैं और वे देश के प्रतिष्ठित अखबारों में संपादक रह चुके हैं। उनका मानना है कि आज भारत में लोकतंत्र अपने अंतिम चरण पर है। इसके चारों स्तम्भ − कार्यपालिका (एक्सीक्यूटिव), विधान मंडल (लेजिस्लेचर), न्यायपालिका, और प्रेस या मीडिया − खोखले हो चुके हैं। क़िताब में झा बताते हैं कि किन कारणों से भारत की राजनीति और भारतीय समाज, दक्षिणपंथी राजनीति के चपेट में आ गए हैं। यानी, किन कारणों से भारत...

एपिसोड 34: ‘सेलिब्रेशन एंड प्रेयर’ − अशोक वाजपेयी

आज़ाद भारत के महान चित्रकार सय्यद हैदर रज़ा ने अपने लम्बे जीवन के ६० वर्ष फ्रांस में गुज़ारे, मगर उनकी कला का मुख्य प्रेरणा स्रोत भारत की संस्कृति रही। इस प्रेरणा का सबसे जाना-माना प्रतीक है ‘बिंदु’, वो काले या अन्य रंग का गोल घेरा जो रज़ा साहब के चित्रों में हमारी नज़र को अपनी ओर खींचता है। अपनी पुस्तक ‘सेलिब्रेशन एंड प्रेयर’ में अशोक वाजपेयी लिखते हैं, कि बिंदु − एक उत्पत्ति का बिंदु और एक अंत का बिंदु है; एक अधयात्मिक अवधारणा है और सौंदर्यशास्त्र से जुड़ी कृति है; एक स्थिर केंद्र और ऊर्जा का एक स्रोत है; एक मौन की बिंदु और स्फूर्त गति की शरुआत है; एकीकरण और ध्यान का...

एपिसोड 33: ‘अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ द प्रेज़ेंट’ — हिलाल अहमद

जुलाई २०२३ में रेलवे पुलिस के एक सिपाही ने जयपुर-मुंबई सुपर फास्ट एक्सप्रेस में सफर कर ते तीन मुसलमान यात्रियों की गोली मार कर हत्या कर दी, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे मुसलमान थे।अपनी किताब में डॉ हिलाल अहमद लिखते हैं कि इस घटना से पता चलता है कि आज के भारत में हिंसात्मक मुस्लिम-विरोधी माहौल किस हद तक बढ़ चुका है।मगर उन्होंने पिछले दस वर्षों में भारत के मुसलमान नागरिकों के हालात और उनके मुस्लिम पहचान का आकलन सहनशील, निष्पक्ष, और शांत चित्त भाव से किया है।सुनिए एक चर्चा डॉ अहमद के साथ उनकी पुस्तक ‘अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ द प्रेज़ेंट’ पर। एक्स (ट्विटर) पर हिलाल अहमद फेसबुक पर हिलाल अहमद...

एपिसोड 32: ‘अ ड्रॉप इन द ओशन’ − सईदा सईदैन हमीद

पड़ोस के बच्चों ने सात साल की सईदा सईदैन के साथ खेलने से इंकार कर दिया क्योंकि वो मुसलमान थी। नन्ही सईदा ने इस घटना पर एक कहानी लिखी जो बहुत सराही गयी और एक किताब के रूप में छपी। किताब खूब चली और सईदा को तत्कालीन प्रधानमन्त्री पंडित नेहरू के हाथों एक गुड़िया पुरूस्कार में मिली। आगे चल के डॉ सईदा हमीद ने पढ़ा-लिखा, घर बसाया, और घर के बाहर भी बहुत कुछ हासिल किया। वे योजना आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रहीं, और उन्होंने एक कुशल लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता, व शिक्षा-क्षेत्र में कार्यकर्ता के रूप में अपना स्थान बनाया। कितना आसान और कितना मुश्किल है भारत में एक मुसलमान होना − इसका अंदाज़ लगता...

एपिसोड 31: ‘द ग्रेट निकोबार बिट्रेयल’ − पंकज सेखसरिया

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का सबसे दक्षिणी द्वीप ‘द ग्रेट निकोबार’ करीब-करीब पूरी तरह से घने जंगल से ढका हुआ है और आधुनिक सभ्यता से लगभग अछूता है। शोम्पेन और ‘ग्रेट निकोबारी’ आदिवासी समुदाय इस छोटे से द्वीप में सैकड़ों हज़ारों वर्षों से रह रहे हैं। यहाँ अनेकों दुर्लभ पशु-पक्षि, मछलियाँ, व अन्य प्राणी-प्रजातियां पाई जाती हैं। अब भारत सरकार ‘द ग्रेट निकोबार’ द्वीप में एक विशाल ‘ट्रांसशिपमेंट कंटेनर पोर्ट’ यानी बंदरगाह का निर्माण करने जा रही है। साथ ही साथ, एक नए शहर, अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, और पावर प्लांट का भी निर्माण होगा। ये सब करने के लिए...

एपिसोड 30: ‘एच-पॉप’ − कुनाल पुरोहित

कुनाल पुरोहित की किताब में तीन किरदार हैं − गायिका कवि सिंह, लेखक व राजनैतिक ‘कमेंटेटर’ संदीप देओ, और कवि कमल अग्नेय। तीनों के कला और हुनर का, आजीविका और पेशे का, केंद्र है हिंदुत्व की विचारधारा; और तीनों अपने श्रोताओं तक पहुँचने के लिए निर्भर हैं इंटरनेट व ‘ऑनलाइन’ जगत पर। क़िताब में, कुनाल इनके सोच, परिवेश, काम-काज, और जीवन के उतराव-चढ़ाव को उजागर करते हैं। और इस तरह, ‘एच-पॉप − द सेक्रेटिव वर्ल्ड ऑफ़ हिंदुत्वा पॉप स्टार्स’ हमारे समय का एक आइना बन जाता है। इंस्टाग्राम पर कुनाल पुरोहित एक्स (ट्विटर) पर कुनाल पुरोहित फेसबुक पर कुनाल पुरोहित लिंक्ड इन पर कुनाल पुरोहित...

एपिसोड 29: ‘नालंदा − हाउ इट चेंज्ड द वर्ल्ड’ − अभय कुमार

नालंदा महाविहार का इतिहास शुरू होता है सम्राट अशोक के समय से, यानी ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से, और खत्म होता है — 1,500 साल बाद — बारहवीं शताब्दी में। ‘नालंदा’ किताब के लेखक अभय कुमार बताते हैं कि अपने समय में नालंदा ज्ञान का एक विश्वविख्यात केंद्र था जहाँ चीन, तिब्बत, कोरिया और जापान जैसे दूर-दराज़ देशों से लोग पढ़ने आते थे। मगर आज नालंदा एक रहस्य है। क्या है नालंदा का महत्व? क्यों आज की वैश्विक आधुनिक सभ्यता नालंदा की ऋणी है? क्या बख्तियार खिल्जी ने वाकई नालंदा का विध्वंस किया था? सुनिए एक चर्चा अभय कुमार के साथ उनकी किताब ‘नालंदा’ पर। इंस्टाग्राम पर अभय कुमार एक्स...

एपिसोड 28: ‘द मेनी लाइव्स ऑफ़ सईदा एक्स’ − नेहा दिक्षित

नेहा दिक्षित की किताब ‘द मेनी लाइव्स ऑफ़ सईदा एक्स’ कहानी है सईदा की, जो बनारस के दंगो में सब कुछ खोने के बाद, आजीविका की तलाश में अपने पति और छोटे बच्चों के साथ १९९६ में दिल्ली आ जाती है। अगले २४ सालों में सईदा दिल्ली में ५० अलग-अलग तरह के काम करती है, जैसे साइकिल के पुर्जे बनाना, बादाम छीलना, डॉक्टर के क्लीनिक में सफाई करना, या गजक, खिलौने और अगरबत्ती बनाना। दिन में १६ से १८ घंटों काम करने के बावजूद सईदा रोटी, कपड़े, और मकान के लिए हमेशा झुझती रहती है। वर्ष २०२० में दिल्ली में दंगे होते हैं और एक बार फिर सईदा का सब कुछ लुट जाता है। सुनिए ‘द मेनी लाइव्स ऑफ़ सईदा एक्स’...

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