ईसाई मिशनरियों द्वारा भारत के आदिवासियों के बीच ईसाई धर्म के प्रसार को रोकने के लिये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने १९५२ में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण की स्थापना की। वनवासी कल्याण आश्रम ने आदिवासियों के बीच हिन्दू धर्म व संस्कृति के प्रचार और समाज सेवा के राह को अपनाया। समय के साथ, वनवासी कल्याण आश्रम ने सत्तारूढ़ ताकतों द्वारा आदिवसीययों के शोषण के खिलाफ भी आवाज़ उठाई। मगर जैसा डॉ कमल नयन चौबे अपनी किताब ‘आदिवासी ऑर वनवासी’ में दिखलाते हैं, वनवासी कल्याण आश्रम ने कभी भी खुलकर आदिवासियों के हक़ की लड़ाई का समर्थन नहीं किया और न ही इस संघर्ष में उनका साथ दिया। सुनिए किताब पर एक चर्चा डॉ चौबे के साथ।
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- ‘आदिवासी ऑर वनवासी’ अमेज़न पर
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(‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)






