एपिसोड 47: ‘गांधी − द एन्ड ऑफ़ नॉन-वायलेंस’ − मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी

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भारत के आज़ादी के दो साल पहले से ही देश के बँटवारे की सम्भावना बढ़ने लगी और सांप्रदायिक तनाव फैलने लगा। अगस्त १९४६ से देश में हिन्दू-मुस्लिम दंगे छिड़ गए। महात्मा गांधी बंगाल (कलकत्ता व नोआखाली), बिहार, और दिल्ली जा के शांति के लिए सत्याग्रह करने लगे। अपने जीवन के आखिरी पंद्रह महीनों में गांधी शांति का सन्देश ले के पैदल गाँव-गाँव गए। मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी की किताब, ‘गांधी − द एन्ड ऑफ़ नॉन-वायलेंस’ उनके जीवन के इस दौर का एक गहरा अध्यन है। किताब में गांधी की यात्रा-कार्यक्रम, दिनचर्या, राजनैतिक गतिविधियों, उनके करीबी सहयोगियों, और उनके विवादित यौन-प्रयोग के अलावा, उनकी विडम्बनाओं, दर्द और बेबसी का विवरण है। और इसके साथ है, जन-संहार के सन्दर्भ में अहिंसा, सत्याग्रह, शांति, क्षमा, सर्व-धर्म-संभव जैसे गांधीवादी मूल्यों की जाँच। सुनिए किताब पर एक चर्चा मानष के साथ। 

  1. इंस्टाग्राम पर मानष फ़िराक़ भट्टाचार्जी
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  4. ‘गांधी − द एन्ड ऑफ़ नॉन-वायलेंस’ अमेज़न पर

(‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

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