एपिसोड 44: ‘गोलवलकर’ − धीरेन्द्र झा

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भारत को आज़ादी मिलने के तीन हफ्ते बाद, ४ सितम्बर १९४७ को, दिल्ली में दंगे शुरू हो
गए। शहर के करोल बाग़ इलाके में एक हाई-स्कूल में छात्र परीक्षा दे रहे थे। इसी समय
स्कूल में एक भीड़ घुस गई और उसने परीक्षा देते हुए मुसलमान छात्रों का क़त्ल कर दिया।
तीन दिनों में दिल्ली के ८,००० से १०,००० मुसलमान निवासी मारे गए। इसके एक महीने
बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर ने शहर के तीन
इलाकों के हिन्दुओं को विशेष मुबारकबाद दी − करोल बाग़, सब्ज़ीमंडी, और पहाड़गंज। ये
वही इलाके थे जहाँ मुसलामानों को सबसे ज़्यादा क्षति पहुँची थी। सुनिए एक चर्चा
गोलवलकर की जीवनी के लेखक धीरेन्द्र झा के साथ, उनकी किताब पर।

 

  1. ‘गोलवलकर’ अमेज़न पर
  2. धीरेन्द्र झा की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर

(‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

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