किन हालात में जम्मू और कश्मीर की रियासत सन १९४७ में भारत से जुड़ी, ये विषय आज भी विवादों में घिरा है। कश्मीर के भारत में विलय में ब्रिटैन, भारत, पाकिस्तान, और कश्मीर रियासत की क्या भूमिका रही? इसमें पंडित नेहरू, लार्ड मौन्टबेटन, मोहम्मद अली जिन्नाह, सरदार पटेल, कश्मीर के राजा हरी सिंह व कई अन्य किरदारों की क्या भूमिका रही? इन सवालों पर एक नई रोशनी डालती है, प्रेम शंकर झा की किताब ‘द ओरिजिन्स ऑफ़ अ डिस्प्यूट — कश्मीर १९४७’। किताब के नवीनतम संस्करण में झा ने पहली बार कुछ अहम् दस्तावेज, जो पहले गोपनीय थे, के जरिये से इस जटिल विषय पर नई जानकारी दी है। सुनिए किताब पर एक चर्चा, प्रेम शंकर झा के साथ।
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- ‘द ओरिजिन्स ऑफ़ अ डिस्प्यूट − कश्मीर १९४७’ अमेज़न पर
- प्रेम शंकर झा की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर
- एपिसोड 35: ‘द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया’ज़ डेमोक्रेसी’ − प्रेम शंकर झा
(‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)






