एपिसोड 52: ‘डी-डेमोक्रेटाईज़ेशन − अ ग्लोबल स्टोरी’ − कविता कृष्णन

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इसी वर्ष, अमरिका ने ईरान में एक स्कूल को मिसाइल से ध्वस्त करके 156 लोगों को मार दिया। मृतकों में १२० बच्चे थे। हमले की निंदा पुरे विश्व में हुई। इसके डेढ़ महीने पहले, ईरान की इस्लामी गणराज्य हुकूमत ने ३०,००० प्रदर्शनकारियों को मार डाला था। इस पर, देश-विदेश के कई वामपंथियों ने प्रदर्शनकारियों को ‘इजराइली एजेंट’ और ‘दंगाई’ करार कर दिया। अपनी किताब ‘डी-डेमोक्रेटाईज़ेशन’ में कविता कृष्णन पूछती हैं कि वामपंथियों की ऐसी क्या विवशता है, कि एक हमले के शिकार ‘दंगाई’ कहलाते हैं, और दूसरे के ‘शहीद’। जवाब मिलता है, किताब में ‘मल्टीपोलर’ यानी बहुध्रुविय विश्व-व्यवस्था के चर्चे में। कविता के अनुसार, ‘मल्टीपोलर’ देशों का संघ, वास्तव में तानाशाहों की मंडली है। मगर वामपंथी संगठन इस व्यवस्था के समर्थक हैं, जो उनके लिए एक ऐतिहासिक भूल सिद्ध होगी। सुनिए कविता कृष्णन के साथ एक चर्चा।इंस्टाग्राम पर कविता कृष्णन  

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एपिसोड 44: ‘गोलवलकर’ − धीरेन्द्र झा

‘आर्टिकल 14’ पत्रिका में कविता कृष्णन पर एक आलेख    

(‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

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